ये बहुत पुराना पारम्परिक औषधीय पेड़ है । लगभग 4000 सालों से इसे उपयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेद ने दशमूल जड़ीबूटी में
इसे शामिल किया है। दशमूल दस ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं का मिश्रण है जिनकी मदद से कई प्रकार की लाभकारी आयुर्वेदिक दवा बनाई
गर्मी के मौसम में बील बाजार में आसानी से मिल जाता है। इसका ऊपर का कड़क छिलका तोड़कर अंदर का गूदा चार चम्मच एक
गिलास पानी में दो घंटे भिगो दें। मसल कर छान कर मिश्री मिलाकर पीएं। मिश्री की जगह काला नमक भी ले सकते है।
जाती है जो विभिन्न रोगों को ठीक करती है। बेल का फल अनेक प्रकार के रोगों की दवा है। ये कब्ज , अपच , पेट के अल्सर , क चम्मच रस प्रतिदिन लेना चाहिए। रस निकालना भी सरल है। पत्तियों को कूट पीस कर कपड़े में डालकर निचो कर रस निकाल लें। ये
रस कुछ दिन लेने से जिन्हे कोलेस्ट्रॉल नहीं है उन्हें भी दिल की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।बवासीर , साँस की तकलीफ , डायरिया आदि से मुक्ति वायरल और बेक्टेरियल इन्फेक्शन को रोकता है।
बेल एक ऐसा पेड़ है जिसके हर हिस्से का इस्तेमाल सेहत बनाने और सौंदर्य निखारने के लिए किया जा सकता है. आयुर्वेद में इसके कई फायदों का उल्लेख मिलता है. इसका फल बेहद कठोर होता है लेकिन अंदर का हिस्सा मुलायम, गूदेदार और बीजों से युक्त होता है.
1. दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक
बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
2. गैस, कब्ज की समस्या में राहत
नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
3. कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार
बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
4. दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद
आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
। कैंसर जैसे रोग से बचाता है। इनके अलावा भी कई रोगों में काम आता है।
3 चम्मच ,सूखा बील का पाउडर -3 चम्मच और सोंठ पाउडर दो चम्मच इन तीनो को एक गिलास पानी में उबाल लें। जब
आधा रह जाये तब ठंडा होने पर छान लें। ये पानी सुबह शाम पीने से पेचिश ठीक हो जाती है।
बील में विशेष फेनोलिक कम्पाउंड और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो पेट के अल्सर को ठीक करते है। पेट में लम्बे समय तक होने वाली
त्वचा के ऊपर बनने वाले सफ़ेद धब्बे बील की मदद से ठीक हो सकते है। बील के गूदे में सोरलिन ( psoralen ) नाम का तत्व होता है जो
स्किन की धूप सहने की शक्ति बढ़ाता है। इसके अलावा बील में कैरोटीन भी होता है। ये दोनों तत्व मिलकर स्किन का रंग एकसार बनाए रखने
में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाते है।